किसान की कुंडली में मृत्युयोग क्यों? हैरान कर देंगे ये आंकड़े…

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why farmers commiting suicide in India, here are some shocking facts

Last updated : 6 April, 2017 | My Village,Top News

देश में क्या किसान होना अभिशाप है? सवाल इसलिए क्योंकि कड़ी मेहनत कर देश का पेट भरने वाला अन्नदाता आत्महत्या कर रहा है। किसान की किस्मत में आज भी बदहाली है, बेबसी है, और मजबूरियों की लंबी फेहरिस्त है। उधर सरकारें किसान को खुशहाल बनाने के तमाम दावे कर रही हैं, कर्ज़माफी से लेकर दूसरी योजनाएं लाने के दावे हो रहे हैं लेकिन फिर भी किसान मर रहा है सवाल ये कि आखिर किसान की कुंडली में मृत्युयोग क्यों?

धरती का सीना चीरकर हम सब का पेट भरने वाला किसान इतना मजबूर क्यों हुआ कि उसने अपनी जीवनलीला खत्म करने में एक पल भी नहीं लगाया? क्यों उसकी जिंदगी इतनी बड़ी बोझ बन गई कि उसे फांसी में ही ज्यादा सुकून मिला। एक किसान और कर्ज़ के बोझ तले इस दुनिया से रुखसत हो गया। बांदा का कुलदीप 3 लाख के कर्ज में ऐसा दबा कि 3 बिनब्याही बेटियों से भी मोह खत्म हो गया। ये अंतहीन दर्द वैसे तो देश के कई किसानों का है लेकिन इस कहानी के बेबस किरदार का ताल्लुक यूपी के बांदा से है, बांदा के मटोंध थाना इलाके के आचार्य थोक में रहने वाले किसान कुलदीप के घर आज मातम है। बेबसी है, मायूसी है अंतहीन आंसू हैं, वैसे कुलदीप का मतलब ही कुल को रौशन करने वाला होता है लेकिन आज कुलदीप के घर में बेबसी का अंधेरा है।

  • यूपी सरकार किसानों को कर्ज़ माफ कर रही है, किसानों को खुशहाल बनाने के लिए योजनाएं बना रही है, लेकिन ऐसे किसानों तक कब योजनाएं पहुंचेंगी। NSSO की रिपोर्ट बताती है कि देश के किसान परिवारों पर औसतन 47 हजार रुपये का कर्ज़ है।
  • पिछले 10 वर्षों में कर्ज के बोझ से दबे किसान परिवारों की संख्या 48.6 फीसदी से बढ़कर 51.9 फीसदी हो गई है।
  • देश में आज भी 40 फीसदी किसानों को कर्ज के लिए सेठों और साहूकारों के पास जाना पड़ता है।
  • National Crime Records Bureau के आंकड़ों के मुताबिक, 1995 से अब तक भारत में करीब 3 लाख से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
  • अकेले 2015 में देश में 12 हज़ार 602 किसानों ने आत्महत्या की। जबकि 2014 में देश में 12 हज़ार 360 किसानों ने आत्महत्या की थी।
  • देश में हर महीने 1 हज़ार 50 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। देश के किसान परिवारों पर औसतन 47 हजार रुपये का कर्ज़ है।
  • बात तमिलनाडु की करें तो साल 2011 से 2015 के बीच तमिलनाडु में 2 हज़ार 728 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।
  • प्रदर्शनकारी किसानों के मुताबिक पूरे तमिलनाडु में 39 हज़ार एकड़ जमीन बेकार हो चुकी है, क्योंकि तमिलनाडु में पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है और खेत सूख रहे हैं।

हालांकि मद्रास हाई कोर्ट ने जरुर किसानों को राहत देने की कोशिश की और सरकारी अधिकारियों को आदेश दिया कि सभी किसानों का कर्ज माफ करे और किसानों को कर्ज़ वसूली के लिए तंग न करें। लेकिन इसका कितना असर होगा ये अभी भविष्य की बात है। सिर्फ तमिलनाडु में ही नहीं बल्कि पूरे देश में बहुत खराब हैं।

जियो टैगिंग की शुरुआत

यूपी में 92 प्रतिशत छोटे किसान हैं। जानकारी के मुताबिक 62,000 करोड़ रुपए का कर्ज किसान लौटा नहीं पाए हैं। हालांकि अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में योगी सरकार ने किसानों की कर्ज़माफी के फैसले पर मुहर लगा दी है। गौरतलब है, यूपी में किसानो की कर्ज़माफी के बाद मुख्यमंत्री ने देवेन्द्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में किसानो की कर्ज माफी को लेकर संकेत दिए हैं। दरअसल फसल खराब होने पर किसानों को एक ही आस रहती है वो है मुआवज़ा। लेकिन मुआवज़े में कभी देरी-कभी हेराफेरी किसानों पर पहाड़ जैसी टूटती है। अब इस मुश्किल से निपटने के लिए कृषि मंत्रालय ने तकनीक का सहारा लिया है।

  • दरअसल कृषि मंत्रालय इसके लिए जिओ टैंगिंग की शुरुआत करने जा रहा है। जिसकी मदद से इन सभी परेशानियों का समाधान निकलेगा।
  • इसके लिए कृषि मंत्रालय ISRO के साथ करार करेगा। इस App के ज़रिए फसल की लिस्टिंग होगी और कृषि क्षेत्र में दी गई सब्सिडी का सही इस्तेमाल होगा।
  • सब्सिडी के ज़रिए मिलने वाली संपत्ति को Geo Tag करना होगा। साथ ही माइक्रो इरिगेशन, कोल्ड स्टोरेज, जैसे प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग होगी।
  • इस App के ज़रिए फ़सलों की निगरानी भी हो सकेगी और साथ ही किसानों को फ़सल के नुकसान का मुआवज़ा मिलने में आसानी होगी।

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