रेडिएशन से कैंसर? सुप्रीम कोर्ट ने दिया BSNL टॉवर बंद करने का आदेश

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mobile radiation causes cancer? Supreme court orders to shut down BSNL tower

Last updated : 12 April, 2017 | Feature,Top News

मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हरीश तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से बड़ी लड़ाई जीती है। कोर्ट ने माना है कि हरीश को रेडिएशन से कैंसर हुआ। BSNL टॉवर बंद करने के कोर्ट के आदेश से हरीश बेहद खुश हैं। वहीं हरीश के मकान मालिक प्रकाश शर्मा के बेटे ने भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें भी न्याय मिला है। अनिल शर्मा के मुताबिक पिछले साल उनकी मां की मौत की वजह भी मोबाइल रेडिएशन था।

खतरे की घंटी बना रेडिएशन

मोबाइल फोन ने हमारी जिंदगी बदली है। लोगों को 24x7 जोड़ दिया है। मोबाइल फोन के जरिए हर वक्त हम कनक्टेड और अपडेटेड रहते हैं, लेकिन क्या मोबाइल फोन की घंटी हमारे लिये खतरे की घंटी बन गई है? क्या मोबाइल फोन मौत को दावत दे रहा है? क्या मोबाइल फोन हमारी सांसों पर भारी पड़ रहा है। ये सवाल इसलिए क्योंकि मध्य प्रदेश के ग्वालियर के रहने वाले हरीश चंद तिवारी नाम के शख्स की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने एक मोबाइल टॉवर बंद करने का आदेश दिया है। 42 साल के हरीशचंद ने कोर्ट को इस बात के लिए मना लिया कि मोबाइल फोन टॉवर के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से उसे कैंसर हुआ।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया BSNL टॉवर बंद करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर मोबाइल टॉवर को बंद करने का आदेश दिया। ग्वालियर के दाल बाजार इलाके में प्रकाश शर्मा नाम के शख्स के घर पर काम करने वाले हरीश चंद तिवारी ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी। अपनी याचिका में हरीश ने कहा था कि पड़ोसी के घर की छत पर साल 2002 में अवैध तरीके से BSNL का मोबाइल टॉवर लगाया गया था। जिस घर में वो काम करता है वहां से मोबाइल टॉवर की दूरी 50 मीटर से भी कम है। हरीश के मुताबिक पिछले 14 साल से वो लगातार खतरनाक रेडिएशन का सामना कर रहा है। लगातार और लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहने की वजह से उसे हॉजकिन्स लिम्फोमा यानी एक तरह का कैंसर हो गया है। हरीश चंद की अर्ज़ी पर सुप्रीम कोर्ट ने BSNL को 7 दिनों के भीतर उस टॉवर को बंद करने का आदेश दिया।

नज़ीर बना सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल इस मामले की सुनवाई करना शुरू किया था। देश में ये पहला मामला है जब सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल टॉवर के खतरनाक रेडिएशन को आधार बनाकर टॉवर को बंद करने का आदेश दिया है। साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों को रेडिएशन के प्रभावों से जुड़े दस्तावेज जमा करने के लिये भी कहा है।

ग्वालियर के हरीशचंद की याचिका सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मोबाइल टावर रेडिएशन के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ता की आवाज और मजबूत हुई है। हालांकि केंद्र सरकार लगातार ये तर्क देती रही है कि मोबाइल टॉवर के रेडिएशन से नुकसान और दुष्प्रभावों का कोई आधार नहीं है। सरकार ये भी कह चुकी है कि इस बात के कोई सबूत नहीं है कि रेडियो वेव्स से कैंसर होता है। बहरहाल हरीशचंद के मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक नज़ीर बना है। आने वाले दिनों में मोबाइल रेडिएशन को लेकर कई और तथ्य और तस्वीरें सामने आएंगी।

क्या कहती है Research?

गौरतलब है, मोबाइल रेडिएशन से होने वाले नुकसान को लेकर कई रिसर्च और सरकार के अलग-अलग तर्क हैं। जहां रिसर्च में मोबाइल रेडिएशन से सिरदर्द, डिप्रेशन समेत कई दिक्कतें होने की बात सामने आई हैं। कुछ रिसर्च में मोबाइल फोन और कैंसर के कनेक्शन की बात सामने आईं। वहीं केंद्र सरकार और दूरसंचार विभाग रेडिएशन से कैंसर और दूसरी बीमारी से इनकार करता रहा है।

रेडिएशन के दुष्प्रभाव: Symptoms

कई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि मोबाइल रेडिएशन से सिरदर्द, लगातार थकान महसूस करना, चक्कर आना, डिप्रेशन, नींद ना आना, आंखों में ड्राइनेस सुनने में कमी समेत कई तरह की शारीरिक दिक्कतें हो सकती हैं। कई रिसर्च से पता चला है कि मोबाइल फोन और कैंसर में गहरा रिश्ता है। मोबाइल टावर रेडिएशन के खिलाफ काम करने वाले कई संगठनों के मुताबिक इंसानों पर पड़ने वाले दुष्परिणामों के साथ-साथ रेडिएशन से गौरैया, कौवे और मधुमक्खियों को भी बड़ा नुकसान होता है। हालांकि केंद्र सरकार और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया इस बात के सबूत होने से इनकार करती रही है। साथ ही आपको बता दें कि दूरसंचार विभाग ने पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल दिया था।

क्या कहती है सरकारी हलफनामा और WHO रिपोर्ट?

हलफनामे में सरकार ने कहा था कि देश में 12 लाख से अधिक मोबाइल फोन टॉवर हैं। 3.30 लाख मोबाइल टॉवरों का परीक्षण किया है, जिनमें से सिर्फ 212 टावरों से रेडिएशन तय सीमा से अधिक पाया गया। ऐसे टॉवरों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। दूरसंचार विभाग ने अपने हलफनामे में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यानी WHO की रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एरिया में रहने के किसी भी दुष्परिणाम की पुष्टि नहीं हुई।

आपको बता दें कि 2014 में एक संसदीय समिति ने केंद्र सरकार को मोबाइल फोन टॉवर और हैंडसेट के एडिएशन का इंसानों पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच कराने की सिफारिश की थी। बहरहाल मोबाइल टॉवर, रेडिएशन, कनेक्टिविटी और इससे जुड़े दूसरे पहलूओं को लेकर विस्तार से समझने और उसके बाद अपनाने की जरूरत है।

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