बागेश्वर: किसानों की फसल बर्बाद करने पर आमादा लघु सिंचाई विभाग

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irrigation department failed to deliver any irrigation project for bageswar farmers

Last updated : 4 April, 2017 | My Village

उत्तराखंड के बागेश्वर का लघु सिंचाई विभाग इस बार किसानों की फसल बर्बाद करने पर आमादा है। पूरे एक साल विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा, जिससे सिंचाई की एक भी नई योजना नहीं बन पाई। विभागीय अधिकारी साल भर अपने अपने दफ्तरों में बैठकर आराम फरमाते रहे।

उत्तराखंड में सरकारी महकमा किस तरह लापरवाह बना हुआ है, इसकी एक बानगी बागेश्वर के लघु सिंचाई विभाग में देखने को मिली है। चौंकाने वाली बात ये है कि पूरे बारह महीने विभाग के अधिकारियों ने कुर्सी तोड़ने के सिवाय कुछ भी नहीं किया। विभागीय दस्तावेज इस बात का सबूत हैं। जिसके मुताबिक सिंचाई विभाग ने सालभर में एक भी योजना तैयार नहीं की और जब योजना ही नहीं बनी तो धरातल पर काम करने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि विभाग ने पिछले वित्तीय वर्ष के शुरू होते ही विभिन्न योजनाओं में शासन से दो करोड़ की डिमांड की। शासन ने भी बिना किसी योजना के विभाग को 50 लाख रूपये की स्वीकृति दे दी लेकिन बाद में केवल 36 लाख रूपये ही जारी किए। मजे की बात ये है कि इस धनराशि में से भी विभागीय अफसरों ने 12 लाख रूपये की बड़ी धनराशि पिछले साल की देनदारी में चुका दिए और बाकी बचे साढ़े चार लाख रूपये अस्थाई कर्मचारियों के मासिक भुगतान में खर्च कर दिए। शेष 19 लाख रूपये पुराने और खस्ताहाल हाईड्रम के मेंटेनेंस में खर्च कर दिए।

अब सवाल यह उठता है कि जब विभाग को सालभर कुछ करना ही नहीं था तो इतना तामझाम क्यों? इतना ही नहीं अब अधिकारियों के इस गैर जिम्मेदाराना रवैये पर सवाल उठने लगे हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक 1981-82 में उन्होंने सबसे पहले ज़िले के बालीघाट क्षेत्र में हाईड्रम के माध्यम से सिंचाई की योजना तैयार की थी। बीते 30 सालों में सिंचाई के लिए 33 हाईड्रम की योजनाएं बनाई गईं। इनमें हर योजना में विभाग ने आठ से 10 लाख की धनराशि खर्च की। वर्तमान में अब तमाम कोशिशों के बावजूद 19 हाईड्रम ही काम कर रहे हैं जिनमें सालाना 20 लाख से अधिक की धनराशि खर्च की जा रही है। इतना ही नहीं विभाग की लापरवाही से 14 हाइड्रम योजनाओं पर ताला लग गया है। लेकिन विभाग को अब भी उम्मीद है कि पैसा मिला तो योजनाएं फिर से चल सकती हैं। हाईड्रम और सिंचाई की पुरानी योजनाओं की गुणवत्ता पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।

विभाग के इस रवैये पर जिलाधिकारी ने भी नाराजगी जताई है। अपने गांवों का दौरा करने पर योजनाओं के स्थलीय निरीक्षण में जिलाधिकारी ने साफ किया था कि विभाग क्षतिग्रस्त गूल और हाइड्रम की मरम्मत के प्रस्ताव सौंपे। लेकिन लापरवाह अधिकारियों ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया और तय समय सीमा के बाद प्रस्ताव भेजे जिसे जिलाधिकारी ने गंभीर लापरवाही माना है।

कृषि के लिहाज से बागेश्वर को बेहद समृद्ध माना जाता है लेकिन बदलते मौसम के कारण अन्य जगहों की तरह यहां की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। कृषि विभाग के मुताबिक जिले में केवल 5 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि ही सिंचिंत श्रेणी है, जबकि 16 हजार हेक्टेयर भूमि में फसल उगाने के लिए सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है। अब ऐसे में जबकि विभागीय अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं और सिस्टम गहरी नींद में हो तो भला किसानों की सुध किसे होगी?

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