ट्रिपल तलाक को खत्म करना कुरान के खिलाफः मुस्लिम बोर्ड

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Declaring Triple Talaq illegal, as it is like writting quran again

Last updated : 28 March, 2017 | India

ट्रिपल तलाक का मामला इन दिनों विवादों में है। एेसे में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड(AIMPLB) ने कहा है कि ट्रिपल तलाक को खत्म करना अल्लाह के खिलाफ जाने जैसा है। बोर्ड का कहना है कि ट्रिपल तलाक को खत्म करना गलत होने के साथ ही ये अल्लाह के आदेशों का अपमान करने के बराबर भी है। बोर्ड का कहना है कि एेसा करना कुरान शरीफ को दोबारा लिखने जैसा है। बोर्ड ने ये भी कहा कि कुरान में बदलाव करना गुनाह है।

बोर्ड ने ट्रिपल तलाक में बदलाव न करने को लेकर संविधान के आर्टिकल 25 का भी हवाला दिया है। संविधान का ये अनुच्छेद कहता है कि कोई भी व्यक्ति अपने मन से किसी भी धर्म को मानने का हकदार है। बोर्ड के अनुसार ट्रिपल तलाक Mode Of Divorce है, इसलिए इसे खत्म नहीं किया जा सकता। 

ट्रिपल तलाक के मामले में सुनवाई जल्द ही होने वाली है, उससे पहले ही कोर्ट की तरफ से ये बयान दिया गया है। इतना ही नहीं बोर्ड ने कुरान के उस हिस्से का भी ज़िक्र किया है जिसमें तलाक के बारे में बताया गया है। बोर्ड का कहना है कि कुरान शरीफ में लिखा है 'तीन बार तलाक हो जाने से पति के लिए उसकी पत्नी हराम हो जाती है। यानि पति का पत्नी के ऊपर कोई हक नहीं रह जाता। अगर दोनों फिर से एक साथ रहना चाहते हैं तो दोनों के बीच में हलाला होना ज़रूरी है।'

हलाला को आसान शब्दों में समझा जाए तो तीन बार तलाक हो जाने बाद अगर पति वापस अपनी पूर्व पत्नी को हासिल नहीं कर सकता। एेसा तब तक संभव नहीं है जब तक उस महिला की दूसरी शादी न हो जाए और वह शादी टूट न जाए। महिला के दूसरे पति से तलाक होने या पति की मृत्यु होने के बाद ही पूर्व पति उससे शादी कर सकता है। 

कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए बोर्ड की तरफ से ये टिप्पणी की गई है। बोर्ड के वकील एजाज़ मकबूल ने कहा कि इस तरह से कुरान की आयतों में बदलाव करना गुनाह है और अल्लाह के आदेशों का अपमान करने जैसा है। बोर्ड ने कोर्ट में ये भी कहा कि सभी मुस्लमानों के लिए ये कानून मानना अनिवार्य है कोई भी अपने हिसाब से इनमें बदलाव नहीं कर सकता। 

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