जानिए, कैसे सिल्वर स्क्रीन पर जया बच्चन की सादगी के लोग हो गए थे दीवाने…

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Birthday Special: know reasons why audience loved Jaya Bachchan's simplicity on silver screen

Last updated : 9 April, 2017 | Lifestyle,Top News

बॉलीवुड की एक एेसी एक्ट्रेस जिसने सिनेमा, पॉलिटिक्स, सोशल सर्विस और अपनी पारिवारिक भूमिका को एक साथ निभाया। आज इन सभी क्षेत्रों में वह एक मिसाल बन चुकी हैं। जी हां, बात हो रही है जया बच्चन की। जया ने हिन्दी सिनेमा का रुख एक ऐसे वक्त में किया था, जब शर्मिला टैगोर, मुमताज और हेमा मालिनी जैसी अभिनेत्रियां दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुकी थीं। पर किसको पता था कि सत्तर के दशक में जया अपने मासूम और भोले चेहरे से लोगों के दिलों में खास मुकाम बना लेंगी। उस वक्त सिल्वर स्क्रीन पर जया भादुड़ी का ऐसा जादू चला कि उनकी सादगी के सभी लोग दीवाने हो गए। आइए जानते हैं जया बच्चन के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।

  • 9 अप्रैल 1948 को मध्यप्रदेश के जबलपुर में जन्मीं जया बच्चन का रविवार को जन्मदिन है।
  • 15 साल की उम्र में एक्टिंग करियर की शुरूआत की।
  • जया ने फ़िल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया से एक्टिंग सीखी।
  • 3 जून, 1973 को बॉलीवुड में उस समय एंग्री यंग मैन के तौर पर पहचान बना चुके अमिताभ बच्चन से जया की शादी हो गई।
  • अपने करियर में जया आठ बार फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित हुईं।
  • 2004 में समाजवादी पार्टी की तरफ से जया बच्चन राज्यसभा सदस्य बनीं।
  • उन्होंने डायरेक्टर सत्यजीत रे की बंगाली फिल्म 'महानगर' (1963) में सपोर्टिंग एक्ट्रेस का किरदार निभाया था।
  • सिनेमा, पॉलिटिक्स, सोशल सर्विस से लेकर एक मां, सास और नानी-दादी की अपनी पारिवारिक भूमिका में भी जया आज एक सफल नाम है।
  • परिवार और करियर इस दोनों ही मोर्चे पर जया ने बड़ी ही समझदारी से ताल-मेल बिठाया है।
  • जब जया 'शोले' की शूटिंग कर रहीं थीं, तब वो प्रेग्नेंट थीं।
  • यह जानना भी दिलचस्प है कि जया बच्चन और अमिताभ की मुलाकात ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फ़िल्म 'गुड्डी' के सेट पर कराई थी। इसके बाद 1973 में अमिताभ बच्चन और जया साथ-साथ 'ज़ंजीर' में नजर आए। इसी फ़िल्म के दौरान दोनों करीब आए और दोनों ने शादी करने का फैसला ‌ले लिया। 3 जून, 1973 को दोनों शादी के बंधन में बंध गए।
  • जया बच्चन ने अमिताभ के साथ पहली बार 1972 में फिल्म 'बंसी बिरजू' की थी और उसके बाद जंजीर, अभिमान, चुपके-चुपके, मिली, शोले और कभी खुशी कभी गम जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया।
  • इन सभी फिल्मों में जया की एक्टिंग में ऐसी सादगी दिखी, जिससे दर्शक प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। उनके चेहरे की सादगीपूर्ण हंसी ऐसी होती थी, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सकता था। जया की सादगी का जादू आज भी बरकरार है।
  • अमिताभ-जया की जोड़ी आज फिल्म इंडस्ट्री की सबसे प्रभावशाली कपल्स में से है।
  • आपको शायद ही मालूम हो कि जया को लिखने का भी शौक है। अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फ़िल्म 'शहंशाह' (1988) की स्टोरी जया बच्चन ने ही लिखी थी।
  • 1992 में ही जया बच्चन को 'पद्मश्री' सम्मान मिल चुका है। उन्हें उपहार, अभिमान, कोरा कागज, नौकर, हजार चौरासी की मां, फिजा, कभी खुशी कभी गम और कल हो ना हो जैसी फ़िल्मों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है।

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